8th Pay Commission: 5 अहम बदलाव जो सैलरी और भत्तों पर डाल सकते हैं असर, 7वें वेतन आयोग ने किया था ये काम
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में, 8वें वेतन आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन की समीक्षा करने का काम सौंपा गया है. उम्मीद है कि यह आयोग नवंबर 2025 में अपने गठन के लगभग 18 महीने बाद, यानी मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा.
Highlights
- 7वें वेतन आयोग ने 'पे मैट्रिक्स' लागू किया था.
- नया फिटमेंट फैक्टर बेसिक पे पर असर डाल सकता है.
- 7वें वेतन आयोग ने सालाना इंक्रीमेंट को 3% पर ही बनाए रखा.
8वां वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में बैठकें करेगा. पिछले कुछ महीनों में इस पैनल ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली और लद्दाख में भी इसी तरह की बातचीत की है. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में, 8वें वेतन आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन की समीक्षा करने का काम सौंपा गया है. उम्मीद है कि यह आयोग नवंबर 2025 में अपने गठन के लगभग 18 महीने बाद, यानी मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगा.
जब कर्मचारी और पेंशनभोगी फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन के बारे में स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं, तो 7वें वेतन आयोग द्वारा किए गए बदलाव इस बात का आधार बनते हैं कि 8वां वेतन आयोग क्या सिफारिशें कर सकता है.
पे मैट्रिक्स ने पे बैंड और ग्रेड पे की जगह ली
7वें वेतन आयोग ने पे बैंड और ग्रेड पे सिस्टम की जगह ‘पे मैट्रिक्स’ लागू किया. इसमें कर्मचारियों को अलग-अलग पे लेवल में रखा गया. 8वां वेतन आयोग मौजूदा पे लेवल, कम से कम वेतन और मैट्रिक्स के अंदर वेतन बढ़ने के तरीके में बदलाव कर सकता है, जिससे सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ सकती है.
2.57 का फिटमेंट फैक्टर
7वें वेतन आयोग ने वेतन और पेंशन में बदलाव के लिए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर सुझाया था. हालांकि, इसे सीधे तौर पर सैलरी में 157% की बढ़ोतरी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि इस फैक्टर में DA (महंगाई भत्ता) के असर को भी शामिल किया गया था.
8वां वेतन आयोग नया फिटमेंट फैक्टर बदले हुए बेसिक पे पर काफी असर डाल सकता है, लेकिन असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नया वेतन स्ट्रक्चर कैसे बनाया जाता हैय BPMS, NC(JCM) और AIDEF जैसे प्रमुख यूनियन 3.5 से 4 गुना के फिटमेंट फैक्टर मल्टीप्लायर की मांग कर रहे हैं.
यह देखना बाकी है कि सरकार आखिरकार क्या फैसला लेती है, क्योंकि आर्थिक हालात, कर्मचारियों का मनोबल, सरकारी सीमाएं और कई अन्य बातें फिटमेंट फैक्टर के फैसले पर काफी असर डालेंगी.
मिनिमम सैलरी बढ़कर ₹18,000 हो गई
7वें वेतन आयोग ने 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के कारण, न्यूनतम बेसिक वेतन को 6वें वेतन आयोग के 7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया.
8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन में किसी भी बढ़ोतरी का असर पूरे पे मैट्रिक्स पर पड़ सकता है. इससे कर्मचारियों की सैलरी में सुधार हो सकता है, बशर्ते महंगाई और रोजमर्रा के खर्च की क्षमता जैसे दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाए.
भत्तों को तर्कसंगत बनाया गया
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 7वें वेतन आयोग ने 197 भत्तों की समीक्षा और विश्लेषण किया. आयोग ने 53 भत्तों को खत्म करने और 37 भत्तों को दूसरे भत्तों में मिलाने की सिफारिश की. HRA में भी बदलाव किया गया. 7वें वेतन आयोग के दौरान हुए ये बदलाव बताते हैं कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों को न सिर्फ बेसिक वेतन में, बल्कि HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे फायदों में भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
सालाना इंक्रीमेंट 3% पर बना रहा
7वें वेतन आयोग ने सालाना इंक्रीमेंट को 3% पर ही बनाए रखा, जिसमें इंक्रीमेंट की गणना संशोधित बेसिक वेतन के आधार पर की जाती है. 8वां वेतन आयोग मौजूदा सिस्टम को बनाए रख सकता है या इंक्रीमेंट का नया स्ट्रक्चर सुझा सकता है.
7वें वेतन आयोग के बदलाव दिखाते हैं कि वेतन आयोग का संशोधन सिर्फ फिटमेंट फैक्टर के बारे में नहीं है. बेसिक वेतन, पे मैट्रिक्स लेवल, भत्ते और इंक्रीमेंट – ये सभी मिलकर अंतिम सैलरी तय करते हैं.
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर की मुख्य खबर से आगे बढ़कर यह समझने की जरूरत होगी कि उनकी सैलरी और पेंशन में असल में कितना बदलाव हो सकता है.
जयपुर, चंडीगढ़, पुडुचेरी और चेन्नई में होने वाली 8वें वेतन आयोग की आगामी बैठकों में इन पहलुओं पर और रोशनी डाली जाएगी, जब यूनियन और स्टेकहोल्डर पैनल के सामने अपनी चिंताएं और शिकायतें रखेंगे.
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